डरावनी चुड़ैल की कहानी
यह कहानी है एक ऐसे गांव की, जो चारों तरफ घने जंगलों से घिरा हुआ था। गांव का नाम था **मृत्युभूमि**। इस गांव में एक किवदंती प्रचलित थी कि रात के समय जंगल में एक चुड़ैल घूमती है, जो इंसानों की आत्मा खा जाती है।
एक समय की बात है, गांव में एक नई शादीशुदा जोड़ी आई थी। लड़के का नाम **राजन** और लड़की का नाम **सिया** था। दोनों को इस गांव के खतरों के बारे में कुछ नहीं पता था। उन्होंने गांव के बाहर एक छोटा सा घर बनाया और वहीं रहने लगे।
एक दिन, गांव के बुजुर्ग **रामू काका** ने उन्हें चेतावनी दी, "बेटा, सूरज ढलने से पहले घर के अंदर चले जाया करो। यहां की रातें बहुत खतरनाक होती हैं।" लेकिन राजन ने इसे मजाक समझकर हंसी में उड़ा दिया।
कुछ ही दिनों बाद, अमावस्या की रात आई। यह रात गांव के लोगों के लिए सबसे ज्यादा डरावनी होती थी। राजन ने सोचा कि वह जंगल में जाकर लकड़ियां इकट्ठा करेगा। सिया ने उसे बहुत मना किया, लेकिन राजन नहीं माना।
जैसे ही वह जंगल के अंदर पहुंचा, उसे अजीब सी आवाजें सुनाई देने लगीं। वह रुका और चारों ओर देखने लगा। तभी उसने देखा, एक परछाई धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी। परछाई एक महिला की थी, जिसके लंबे खुले बाल थे, सफेद साड़ी थी, और उसकी आंखें खून जैसी लाल थीं।
राजन को समझने में देर नहीं लगी कि यह वही चुड़ैल है, जिसके बारे में रामू काका ने बताया था। वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसके पैर जैसे जमीन में जम गए। चुड़ैल उसके पास आई और धीमी आवाज में बोली, "क्यों आए हो मेरी जंगल में?" उसकी आवाज इतनी ठंडी और डरावनी थी कि राजन कांपने लगा।
अगली सुबह, गांववालों को जंगल के पास राजन की लाश मिली। उसकी आंखें खुली हुई थीं, और ऐसा लग रहा था कि उसने अपनी मौत से पहले कुछ बहुत डरावना देखा था। सिया पूरी तरह से टूट गई थी। उसने तय किया कि वह राजन की मौत का बदला लेगी।
सिया ने गांव के एक तांत्रिक से मदद ली। तांत्रिक ने उसे बताया कि उस चुड़ैल का नाम **निशा** था। वह कभी इस गांव की ही लड़की थी, लेकिन गांववालों ने उसे जिंदा जला दिया था, क्योंकि उन पर शक था कि वह जादू-टोना करती है। उसकी आत्मा अब बदला लेने के लिए भटक रही है।
तांत्रिक ने सिया को एक खास मंत्र और ताबीज दिया, जिससे वह निशा का सामना कर सके। अगली अमावस्या की रात, सिया उस जंगल में गई। निशा फिर से प्रकट हुई, और इस बार उसकी शक्ति पहले से भी ज्यादा भयानक थी।
सिया ने हिम्मत नहीं हारी। उसने तांत्रिक के दिए हुए मंत्र का जाप शुरू किया। निशा चिल्लाने लगी, उसकी आवाज इतनी तेज थी कि पूरा जंगल कांपने लगा। लेकिन सिया ने मंत्र जाप जारी रखा। धीरे-धीरे, निशा की शक्ति खत्म होने लगी। अंत में, वह एक जोरदार चीख के साथ गायब हो गई।
उस दिन के बाद, गांव में कभी किसी ने निशा की आत्मा को नहीं देखा। लेकिन लोग आज भी अमावस्या की रात को घर से बाहर निकलने से डरते हैं।
यह कहानी हमें सिखाती है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, उसे सच्चाई और साहस से हराया जा सकता है।