"साँझ के उस पार"

अन्वी और अंश की पहली मुलाकात कॉलेज के पहले दिन हुई। अन्वी एक जिंदादिल लड़की थी, जो हर छोटी चीज़ में खुशी ढूंढती थी। उसकी आँखों में हजारों सपने थे। दूसरी ओर, अंश एक शांत और गम्भीर स्वभाव का लड़का था, जिसे दुनिया की चकाचौंध से कोई खास मतलब नहीं था।
कॉलेज के ओरिएंटेशन में जब अन्वी ने अंश से सवाल पूछा, "तुम इतने चुप क्यों रहते हो? क्या तुम्हें किसी से बात करना पसंद नहीं है?"
अंश ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "शायद मुझे सही इंसान का इंतज़ार है।"
उसके इस जवाब ने अन्वी का दिल छू लिया। धीरे-धीरे, दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी। अंश अन्वी की हर छोटी बात ध्यान से सुनता, और अन्वी उसे हर दिन ज़िंदगी के नए पहलू दिखाती।
कुछ महीनों में ही दोनों इतने करीब आ गए कि उनके बिना एक दिन भी अधूरा लगता था। अन्वी को अब एहसास होने लगा था कि वह अंश से प्यार करने लगी है। मगर अंश ने कभी इस बारे में बात नहीं की थी।
एक दिन कॉलेज की कैंटीन में बैठते हुए अन्वी ने पूछा, "अंश, तुम हमेशा इतना सोचते क्यों रहते हो? क्या तुम्हारे दिल में कभी किसी के लिए कुछ महसूस हुआ है?"
अंश ने गहरी सांस लेते हुए जवाब दिया, "मुझे नहीं पता, लेकिन शायद हां। और अगर ऐसा हुआ है, तो वो इंसान तुम ही हो।"
यह सुनते ही अन्वी की आँखों में आँसू आ गए। उसने अंश को गले लगाते हुए कहा, "मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए।"
उनका प्यार अब सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि एक बंधन बन चुका था।
कॉलेज खत्म होने के बाद, अंश को एक अच्छी नौकरी मिल गई और वह अपने परिवार के साथ खुश था। लेकिन अन्वी के परिवार को उनके प्यार के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
अन्वी के पिता एक सख्त आदमी थे, जो अपनी इज्जत और समाज की बातों को सबसे ऊपर रखते थे। उन्होंने अन्वी को साफ शब्दों में कह दिया, "तुम्हारी शादी उस लड़के से कभी नहीं होगी। अगर तुमने ऐसा किया, तो हमारा तुम्हारे साथ कोई रिश्ता नहीं रहेगा।"
अन्वी टूट गई। वह जानती थी कि उसके लिए अपने परिवार को छोड़ना आसान नहीं होगा। दूसरी ओर, अंश ने उसे सांत्वना दी और कहा, "मैं तुम्हारे लिए लड़ने को तैयार हूं। लेकिन अगर तुम पर कोई दबाव है, तो मैं पीछे हट जाऊंगा।"
दोनों ने अपने परिवारों को मनाने की हर मुमकिन कोशिश की। मगर समाज और परिवार की दीवारें इतनी ऊंची थीं कि उनके प्यार को जगह नहीं मिल सकी।
एक दिन अन्वी ने अंश से कहा, "शायद हमें इसे यहीं खत्म करना होगा। मैं अपने परिवार को छोड़ नहीं सकती।"
अंश ने जवाब दिया, "अगर तुम्हारी खुशी इसमें है, तो मैं इसे मान लूंगा। लेकिन मेरी ज़िंदगी का हर पल तुम्हारा रहेगा।"
उनकी यह बातचीत उनके रिश्ते का आखिरी दिन साबित हुई।
अन्वी ने अपने परिवार की मर्जी से शादी कर ली। उसका पति एक अच्छा इंसान था, लेकिन वह अंश जैसा नहीं था। अन्वी ने अपने दिल में अंश के लिए जगह बनाए रखी, मगर बाहर से उसने अपनी नई ज़िंदगी को अपनाने की कोशिश की।
अंश ने शहर छोड़ दिया और एक नए शहर में नौकरी करने चला गया। वह खुद को काम में इतना डूबा लेता था कि अन्वी की यादें उसे परेशान न करें। लेकिन सच यह था कि वह कभी उसे भूल नहीं पाया।
कई सालों बाद, अन्वी और अंश का सामना एक शादी में हुआ। अन्वी ने उसे देखा और उसकी आँखें नम हो गईं।
"कैसे हो, अंश?" उसने पूछा।
"ठीक हूं। और तुम?"
"मैं भी ठीक हूं। लेकिन तुम्हें देखकर पुरानी यादें ताजा हो गईं।"
अंश ने मुस्कुराते हुए कहा, "कुछ चीजें हमेशा हमारे साथ रहती हैं, भले ही हम उन्हें पीछे छोड़ दें।"
दोनों ने उस दिन अपने दिल की बात कहने की कोशिश की, मगर उनका प्यार अब एक अधूरी कहानी बन चुका था।
उस दिन के बाद, दोनों कभी नहीं मिले। लेकिन उनकी यादें हमेशा उनके दिल में जिंदा रहीं।
अन्वी ने अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को निभाया, मगर वह कभी पूरी तरह खुश नहीं हो सकी। अंश ने भी अकेले ही अपनी ज़िंदगी बिताई, क्योंकि वह किसी और को अपनी ज़िंदगी में जगह नहीं दे सका।
यह कहानी उन लोगों की है, जो सच्चा प्यार करते हैं लेकिन समाज और हालातों की वजह से साथ नहीं रह पाते।
उनका प्यार भले ही अधूरा रहा, मगर वह हमेशा जिंदा रहा।
"साँझ के उस पार, जब सूरज ढलता है, तब अंधेरा होता है। लेकिन वही अंधेरा उन यादों को चमका देता है, जो दिल के किसी कोने में हमेशा रहती हैं।"